इल्ज़ाम जमाने के हम तो हँस के सहेंगे खामोश रहे हैं ये लब खामोश रहेंगे
तुमने शुरू किया तमाम तुम ही करोगे हम दिल का मामला ना सरेआम करेंगे
हम बदमिज़ाज ही सही दिल के बुरे नहीं दिल के बुरे हैं जो हमें बदनाम करेंगे
बदनाम करके हमको बड़ा काम करोगे शायद जहां में ऊँचा अपना नाम करोगे
हर दाम पे ‘रोहित’ उन्हें तो नाम चाहिए अच्छे से ना मिला तो बुरा काम करेंगे
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